सैयदना उमर फारूक रज़िअल्लाहुअन्हु ने दुनिया को ऐसे सिस्टम दिए जो आज तक पूरी दुनिया में प्रचलित हैं

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आप दुनिया में पहली बार दूध पीते बच्चों, विकलांगों, विधवाओं और बेसहारा लोगों के पेंशन व्यवस्था निर्धारित की, आप दुनिया में पहली बार शासकों, सरकारी अधिकारियों और वालियों की संपत्ति घोषित करने की व्यवस्था की, आप ने अन्याय करने वाले न्यायधीशों (जजों) को सज़ा देने का सिलसिला भी शुरू किया।

सने- हिजरी का आरंभ किया।
जेल की कल्पना दी।
मुअज़्ज़नों का वेतन निर्धारित किया।
मस्जिदों में प्रकाश प्रबंधन कराया।
पोलिस विभाग बनाया।
एक पूरी न्यायिक प्रणाली की स्थापना की।
सिंचाई प्रणाली स्थापित कराई ।
सैन्य छावनियां बनवाई और सेना के नियमित विभाग की स्थापना की।

आप ने दुनिया में पहली बार शासक वर्गों के उत्तरदायित्व को (एकाउन्टेबीलिटी accountability) आरंभ किया।

अप रातों में व्यापारिक काफिलों की चौकीदारी किया करते थे।

“आप कहा करते थे जो शासक न्याय करते हैं, वे रातों को बेख़ौफ़ सोते हैं”।

आप का फरमान था ”राष्ट्र का प्रधान राष्ट्र का सच्चा सेवक होता है।”

आप की मुहर (स्टेंम्प) पर लिखा था:
”नसीहत के लिए मौत ही काफी है।”
आपकी मेज़(दस्तरखान) पर कभी दो करी(सालान) नहीं रखी गई।

आप ज़मीन पर सिर के नीचे ईंट रख कर सो जाते थे।

आप यात्रा के दौरान जहां नींद आ जाती थी तो आप किसी वृक्ष पर चादर तान कर छाया करते थे और सो जाते थे और रात नंगे जमीन पर लेट जाया करते थे।

आप के कपडे पर 14 रफू(पैबंद) थे और उन रफू(पैबंद) में एक लाल चमड़े का प्रत्यारोपण( रफू -पैबंद) भी था। आप मोटा खुरदरा कपड़ा पहनते थे। आप नरम और बारीक कपड़े से नफ़रत करते थे ।

आप किसी को जब सरकारी पद पर पदस्थ करते थे तो उसकी संपत्ति का अनुमान लगवा कर अपने पास रख लेते थे और अगर सरकारी पद के दौरान इस संपत्ति में वृद्धि हो जाती तो आप उसका जवाब तलब (Accountability) करते थे।

आप जब किसी को राज्यपाल बनाते तो उसे नसीहत फ़रमाते थे:
कभी तुर्की घोड़े पर न बैठना, पतले कपड़े न पहनना, छना हुआ आटा न खाना, दरबान न रखना और किसी फरियादी के लिए दरवाज़ा बंद न करना।
आप कहा करते थे: तानाशाह को माफ कर देना मज़लूमों पर अत्याचार है।

आपका यह वाक्य आज मानव अधिकारों के चार्टर की हैसियत रखता है: “माताओं बच्चों को आज़ाद पैदा करती हैं, तुम ने उन्हें कब से गुलाम बना लिया।”

आप इस्लामी दुनिया के खलीफा (उत्तराधिकारी) थे, जिन्हें ” अमीरुल मोमिनीन ” का खिताब दिया गया।

दुनिया के सभी धर्मों की कोई न कोई विशेषता है, इस्लाम की सबसे बड़ी विशेषता न्याय है और सैयदना उमर फारूक (रज़िअल्लाहू अनहु) वह व्यक्ति हैं जो इस विशेषता पर खरा उयरते हैं। आपके न्याय के कारण, न्याय – दुनिया में “फ़ारूक़ी का न्याय” हो गया।
आप शहादत के समय देनदार थे, इसलिए आपकी इच्छा के अनुसार आपका एक अकेला मकान बेचकर उस ऋण का भुगतान कर दिया गया।
सैयदना उमर रजिअल्लाहुअन्हू की ज़िंदगी की मुख़्तसर बातें