राष्ट्रवादी फेसबुक, जो सरकार की पोल खोलने पर आपकी ID ब्लाक कर देता है, लेकिन शंभू रैगर जैसे हत्यारे एक इन्सान को जलाकर मार देते हैं तक इसका कम्यूनीटी स्टैन्डर्ड वायलेट नहीं होता ?

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सवाल यह उठता है कि सरकार के खिलाफ लिखने वालों की आईडी इतनी ब्लाक क्युं होती है और शंभू रैगर जैसे लोग धड़ल्ले से किसी को मारकर जलाकर उसका वीडियो बना कर अपलोड कर देते हैं तो फिर भी कम्यूनीटी स्टैन्डर्ड वायलेट नहीं होता ?

शंभू रैगर जैसे हत्यारे एक इन्सान को जलाकर मार देते हैं तब फेसबुक का कम्यूनीटी स्टैन्डर्ड वायलेट नहीं होता ?

शंभू रैगर हत्यारा

जिस तरह से फेसबुक पक्षपाती हो गया है , फेसबुक इंडिया में बैठे लोगों से अनुरोध है कि यूपी के “पेन्टर बाबू” से कह कर फेसबुक का रंग भी नीले से भगवा कर दे। ख़ैर , इस संदर्भ में – Amit Bhaskar जी का एक अनुभव पढ़िए…

ये कोई आरोप नही है, सिर्फ एक आकलन है। फेसबुक के मोदीमय होने का आकलन

मैं फेसबुक इंडिया में कुछ लोगों को जानता हूँ । एक शख़्स हैं फेसबुक इंडिया के सेल्स और मार्केटिंग डिपार्टमेंट में बड़े पोजीशन पर। नाम नही लूंगा। अक्टूबर 2014 में इनसे एक बार जब बात हुई तब वो एक मीटिंग में थे । मैंने फ़ोन दोबारा किया करीब 2 घंटे बाद, पीछे कुछ शोर था भाषण जैसा। उन्होंने कहा ‘मोदी जी की रैली में हूँ, कल बात करते हैं” । आवाज़ में एक गर्व की अनुभूति थी।

फिर उनका सोशल मीडिया चेक किया । उसमे के फोटो भाजपा के टॉप लीडरशिप के साथ थी। उस वक़्त कुछ अजीब लगा इसपर ध्यान नही दिया । पता करने पर पाया कि उसका ऑफिस दिल्ली/एनसीआर में है और उस दिन मोदी की रैली महाराष्ट्र में थी। ज़ाहिर है की जब उन्होंने मुझसे कहा कि मैं मीटिंग में हूँ तो वो दिल्ली की मीटिंग में तो नही रहे होंगे।

चुनाव प्रचार चल रहा था । दिल्ली से एक फेसबुक के बड़े अधिकारी का उस दिन मोदी की रैली में होना समझ नही आया । इस बीच 2016 में फेसबुक के एमडी बनने के बाद 2017 में उमंग जी ने इस्तीफ़ा भी दिया।.. कारण पता नही ।

फेसबुक पर धाक बढ़ाने की कांग्रेस की कोशिश कम नही रही है । पार्टी ने करोड़ों रुपये फूंके है प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से । लेकिन कांग्रेस की पहुंच एक लिमिटेड लेवल तक ही रही। आम आदमी पार्टी की चमक भी फेसबुक पर फ़ीकी हुई। दूसरी ओर आप मोदी, हिन्दू, राष्ट्रवाद शब्द लिखिए और देखिए क्या खजाना मिलता है ।

पेज छोड़िये, ऐसे ग्रुप मिल जाएंगे जिसमें 1 करोड़ लोगों से ज्यादा जुड़े हैं । जो लोग सोशल मीडिया इस्तेमाल करना जानते हैं वो अच्छी तरह से जानते हैं कि ये आसान नही है , या यूं कहें कि लगभग असंभव है। लेकिन धीरे-धीरे फेसबुक पूरी तरह मोदीमय होता गया।

आप किसी घृणित पोस्ट को, धार्मिक उन्माद, न्यूड फोटो से सजे भक्तों के प्रोफाइल या गली गलौज वाले पोस्ट को रिपोर्ट करिये, फेसबुक कोई एक्शन नही लेता। लेकिन आप सरकार के खिलाफ लिखने वालों के एकाउंट बन्द होते रोज देख सकते हैं।

फेसबुक के आधिकारिक लोग, अनाधिकारिक रूप से सरकार के लिए काम कर रहे हैं और इसके कई सबूत मिल जाएंगे । 2014 के चुनाव में फेसबुक के कई लोग मोदी की टीम द्वारा हायर किये गए । इसके भी सबूत मौजूद हैं।