भोपाल सिमी के आठों सदस्यो के एनकाउंटर का पूरा सच, दोनों और से फायरिंग पर पुलिस जख्मी हुई चाकू से

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यह पहला ऐसा एनकाउंटर होगा जिसमें पुलिस और आतंकवादी दोनों तरफ सो गोलियां चला रहे थे लेकिन तीन पुलिसवाले जख्मी चाकू से हुए. भोपाल सेंट्रल जेल से भागे सिमी के आठ आतंकवादियों के एनकाउंटर से पहले और एनकाउंटर के बाद की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आ गईं हैं जो मध्यप्रेदश सरकार और पुलिस पे सवाल खड़े कर ही हैं.

उस रात करीव सवा तीन बजे जेल के अंदर जेल प्रशासन को खबर मिलती हे की सिमी से जुड़े आठ आतंकवादी जेल से भाग निकले हैं. भागने से पहले एक हेड कांस्टेबल का गला भी काट डाला.एनकाउंटर से सिर्फ 15 मिनट पहले की तस्वीरों में ईंटखेड़ी की पहाड़ी पर खड़े पहले पांच और फिर छह वही आतंकवादी नजर आए जो भोपाल सेंट्रल जेल से भागे थे.

भोपाल लोकल पुलिस, सीटीजी और एसटीएफ की टीमें ठीक इसी जगह उन आठों आतंकवादियों को ढेर कर देती हैं जो आठ घंटे पहले ही जेल तोड़कर भागे थे. इस एनकाउंटर के बाद भोपाल पुलिस एक चौंकाने वाला बयान दिया. बकौल पुलिस आठों आतंकवादी आत्मरक्षा के दौरान मारे गए. क्योंकि पुलिस टीम को देखते ही उन्होंने पुलिस पर गोलियां चलानी शुरू कर दी थीं.

अब सवाल ये है कि जेल से भागे आठ आतंकवादी एनकाउंटर में मारे गए. फिर जेल से बाहर निकलते ही अगले आठ घंटे के दौरान उनके पास हथियार कहां से आ गए? क्या हथियारों का इंतजाम उन्होंने पहले से कर रखा था? हथियार वो जेल से ही लेकर आए थे? क्योंकि अगर जेल में ही उनके पास हथियार होते तो वो हेड कांस्टेबल का गला काटने के लिए स्टील की प्लेट या गिलास काटकर धारधार हथियार नहीं बनाते. यानी साफ है कि अगर उनके पास हथियार था तो वो उन्हें जेल के बाहर मिला. लेकिन हथियार उन्हें जेल से बाहर आते ही किसने दिया?

ईंटखेड़ी में जिस पहाड़ी के करीब ये एनकाउंटर हुआ वहां से आगे कोई रास्ता ही नहीं जाता. यहां से सिर्फ आप कूदकर ही नीचे जा सकते हैं और पहाड़ी से कूदने का मतलब सीधे मौत है. अब सवाल ये है कि जेल से भगने के बाद शहर छोड़ने की बजाए आठों आतंकवादी एक डेड एंड जगह पर रुककर पुलिस का इंतजार क्यों कर रहे थे और एक ही जगह पर क्यों।