एक प्रश्नावली ने बटे हुए मुसलमान को किया एक, जानिए वजह

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अक्सर सुना और देखा जाता है कि कुछ लोग कहते है कि जब बात निकलती है तो दूर तक जाती है. तीन तलाक के मुद्दे से शुरू हुई बात अब समान नागरिक संहिता पर पहुंच गई है. तीन तलाक के विरोध में मोदी सरकार को मिला मुस्लिम महिलाओं का समर्थन अब धीरे-धीरे खिसकने लगा है.

यह यू टर्न लॉ कमीशन की 16 सवालों की प्रश्नावली जारी करने के बाद हुआ. इस प्रश्नावली में समान नागरिक संहिता सहित तीन तलाक, बहुविवाह इत्यादि मुद्दे शामिल हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना वली रहमानी के अनुसार मोदी सरकार हर मुद्दे पर फेल हुई और ये जनता का ध्यान भटकाने की एक साजिश है. वह कहते हैं असल में मोदी सरकार से सरहद संभल नहीं रही है और देश के अंदर एक नई जंग छेड़ दी है.

वहीँ मदनी कहते हैं कि मुसलमान एक हजार साल से इस देश में रहते चले आ रहे हैं और पर्सनल लॉ का पालन कर रहे हैं. कहीं कोई परेशानी नही हुई.” मदनी मुस्लिम पर्सनल लॉ को मुस्लिम महिलाओं के शोषण की वजह भी नहीं मानते. उनका तर्क है कि तलाक के मामले हिंदुओं में अधिक पाए गए हैं.

इसके बाद बोर्ड ने कहा कि संविधान की धारा 25 के अनुसार देश के हर नागरिक को धर्म के अनुसार आस्था रखने, धार्मिक क्रिया-कलाप व अनुष्ठान पर अमल करने और धर्म के प्रचार का अधिकार शमिल है. बोर्ड ने लॉ कमीशन की प्रश्नावली को खारिज कर दिया है और समुदाय से अपील की है कि इसका उत्तर न दें.