देखें असदुद्दीन ओवेसी ने जेल से फरार सिमी के गुर्गों के बारे में क्या खुलासा किया

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ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सिमी के गुर्गों का इस तरह से जेल से फरार होना और उसके बाद उनका एनकाउंटर होना इसके बारे में वीडियो में कुछ बताया है सुने.

वैसे यह बात गौर करने लायक है कि आपसे कुछ महीने पहले भी एक जगह सिमी के गुर्गों ने इसी तरह से जेल को तोड़कर भागने के लिए चालाकी कुछ महीने बाद वह लोग फिर से गिरफ्तार कर लिए गए हैं.

भोपाल सेंट्रल जेल से भागे सिमी के गुर्गों का ब्रांडेड जींस पहनना महंगी घड़ियां और स्पोर्ट्स शूज बेल्ट आदि जेल प्रशासन पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाता है की जेल के अंदर ये सुविधाएं उन्हें कौन मुहैया कराता रहा है.

ज़्यादातर न्यूज़ चैनल और न्यूज़ पोर्टल सिमी के आठ कार्यकर्ताओं को आतंकवादी लिख और बता रहे हैं। जबकि वे आठ कार्यकर्ता अंडर ट्रायल थे।

आरोपसिद्ध होना अथवा चार्ज़शीट फाइल करने के बाद उन्हें तब तक आतंकवादी नहीं लिखा जा सकता जब तक की अदालत से उनके किए अपराध पर सज़ा तय न हो जाए। अंडर ट्रायल आरोपियों पर बम ब्लॉस्ट , बैंक डकैती समेत कई मामले जेल से ही वीडियो कॉफ्रेसिंग माध्यम से चल रहे थे।

इन परिस्थितियों में उन्हें आतंकी कहना सरासर गलत है। हम सबको पता है कि सुरक्षा एजेंसियां एक खास धार्मिक समूह के साथ आतंकवादी का लेबल लगा मीडिया ट्रायल की खुली छूट दे देती हैं।

हाल फिलहाल के ऐसे कई दर्जन मामले सामने आएं हैं जिसमें बेकसूरों को दस-दस साल बाद जेल से आतंक के आरोप से आरोपमुक्त होते देखा गया है। इन हालात में मीडिया से इतनी उम्मीद तो की जा सकती है कि वह सिमी के आठ कार्यकर्ताओं को आतंकवादी न लिखे न बताए। भारतीय मीडिया को बीबीसी से सीखना चाहिए।